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Manzil to teri qabar thi... Bas zindgi guzar gayi aate aate....

Manzil to teri qabar thi
Bas zindgi guzar gayi aate aate
Kya mila tujhe is duniya se 'Bassy'
Apno ne hi dafna diya tujhe jaate jaate.

http://microcontrollergarden.blogspot.com

http://cracksbipo.blogspot.com

http://patelbassar.blogspot.com

http://thegkgarden.blogspot.com
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अँधेरों पर भारी उजाले रहेंगे ...तो हाथों में सबके निवाले रहेंगे...

अँधेरों पर भारी उजाले रहेंगे
तो हाथों में सबके निवाले रहेंगे
न महफ़ूज़ रह पाएगी अपनी अस्मत
जुबाँ पर हमारी जो ताले रहेंगे
ग़मों से भरी ज़िन्दगी जी रहे हैं
मगर भ्रम ख़ुशी का ही पाले रहेंगे
यूँ आँसू बहाने से कुछ भी न होगा
अगर दिल हैं काले तो काले रहेंगे
बढ़ाते रहोगे अगर हौसला तुम
तो पतवार हम भी सँभाले रहेंगे

Bassar
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Chahat Hai Mout Ki Jo Pas Nhi Aati... Tamanna Hai Jis Khusi Ki Wo Raas Nahi Aati...

Chahat Hai Mout Ki Jo Pas Nhi Aati...
Tamanna Hai Jis Khusi Ki Wo Raas Nahi Aati...

Udas Ho Gai Zindgi Rote Rote 'Bassy'...
UnKi Kuch Yade Hai Jo Tadpaane Se Baazz Nhi Aati...

Bassar

bassar@aol.in
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सफलता के सात भेद, मुझे अपने कमरे के अंदर ही उत्तर मिल गये !

सफलता के सात भेद, मुझे अपने कमरे के
अंदर ही उत्तर मिल गये !

छत ने कहा :ऊँचे उद्देश्य रखो !
पंखे ने कहा : ठन्डे रहो !
घडी ने कहा : हर मिनट कीमती है !
शीशे ने कहा : कुछ करने से पहले अपने
अंदर झांक लो !
खिड़की ने कहा : दुनिया को देखो !
कैलेंडर ने कहा : Up-to-date रहो !
दरवाजे ने कहा : अपने लक्ष्य
को प्राप्त करने के लिए पूरा जोर
लगाओ !

Bassar

bassar@aol.in
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बढती प्याज की कीमतों के हिसाब से जल्दी ही फिल्मो के diolouges इस प्रकार के होंगे !

बढती प्याज की कीमतों के हिसाब से
जल्दी ही फिल्मो के diolouges इस
प्रकार के होंगे !
मेरे करण अर्जुन आयेंगे........
और दो किलो प्याज़ लायेंगे
ये ढाई किलो के प्याज़ जब
आदमी लेता है ना
तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है.............
मेरे पास बंगला है गाडी है बैंक बैलेंस है
रुपैया है पैसा है, तुम्हारे पास क्या है??
मेरे पास प्याज़ है!!!!!........
जिनके घर प्याज़ के सलाद होते हैं
वो बत्ती भुझा कर खाना खाते हैं........
चिनॉय सेठ, प्याज़ बच्चों के
खेलनेकी चीज़ नहीं होती
कट जाए तो खून निकल आता है ..........
मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता
प्याज़ हो तो अलग बात है..............
सारा शहर मुझे प्याज़ के नाम से
जानता है ..............
प्याज़ को खरीदना मुश्किल
ही नहीं,नामुमकिन है .............
आपके प्याज देखे, बहुत हसीन हैं, इन्हें
ज़मीन पे मत उतारियेगा
मैले हो जायेंगे।..................
चल धन्नॊऒऒ, आज दस किलो प्याज़
का सवाल है...

Bassar

bassar@aol.in
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काश एक ऐसी भी फेसबुक होती, जिसमे सिर्फ मै होता, तुम होती,...a facebook shayari..

काश एक ऐसी भी फेसबुक होती,
जिसमे सिर्फ मै होता, तुम होती,
मै तुम्हे 'लाईक' करता रहता,
और तुम मुझे कमेन्ट करतीं रहतीं,
न कोई टैगिंग की ज़रुरत होती,
न कोई फ्रेंड रिक्वेस्ट हीहोती,
बस मै और तुम ही छाये रहते,
कोई फालतू फ्रेंड-लिस्ट न होती,
भावनाएं हमारी खूब व्यक्त होतीं,
न मै शरमाता न तुम शरमातीं,
कोई हमें ब्लोक नहीं कर पाता,
ना ही अन्फ्रेंड की नौबत होती,
लाईक कमेन्ट की आज़ादी होती,
एक दुजे पे न कोई पाबन्दी होती,
न मै झांकता तुम्हारी लिस्ट में,
ना ही तुम्हे कोई जलन होती.
तुम मुझे निर्भय हो लाईक करतीं,
मना करने से किसीके ना रुकतीं,
ना कोई ग्रुप होता न राजनीती,
मै मेम्बर होता तुम एडमिन होतीं.

Bassar

bassar@aol.in
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सही मायने में ईद इसे कहते हैं..

इस्लाम में ईद उल फित्र का त्यौहार हिजरत के पश्चात नियुक्त किया गया।
हजरत मोहम्मद जब मक्का से हजरत कर मदीना आए तो उन्होंने देखा कि वहां हर
साल दो त्यौहारों का चलन है। उन्होंने देखा कि इन दो दिनों में वहां लोग
घूमते फिरते और खेलकूद अखाड़े करते। उन्होंने लोगों से कहा कि उनके लिए
अल्लाह ने इससे बेहतर दो दिन नियत किए हैं। और वे दो दिन ईद उल फित्र और
ईद उल अजहा के दिन हैं। इस तरह इस्लाम में इन दो दिनों का रिवाज पड़ा।
ईदउल फित्र का दिन रमजान के रोजों के बाद आता है। इसलिए इसे इनाम का दिन
कहा गया है। रमजान के महीने में इस्लाम मजहब को मानने वालों ने एक महीने
खाने और पीने पर रोक लगाई थी। अब उन्हें छूट रहती है कि खूब अच्छा मनपसंद
की चीज खाएं। इसका अर्थ है कि रमजान का महीना उनके लिए कर्म करने का महीना
था और और ईद का दिन उस कर्म का इनाम पाने का दिन है। ईद का आरंभ ईद का
चांद दिखने से होता है। रमजान के महीने के अंतिम दिन सब लोगों की निगाह
आसमान की तरफ होती है। जिसको चांद दिखाई देता है वह कह उठता है कि ए
अल्लाह तू इस निकलने वाले चांद को हमारे लिए अमन का और सलामती का चांद बना
दे और हम तेरी मर्जी पे चलें। तू इस महीने को अपनी बेशकीमती रहमत का महीना
बना दे। इस तरह ईद का चांद पूरी इस्लामी दुनिया के लिए ना सिर्फ खुशी का
चांद होता है बल्कि वह उन्हें अपने खुदा से भी जोड़ देता है। वह उन्हें
अपनी तरह से खुदा की याद दिलाता है, और लोग अपने लिए, पूरे संसार की
इंसानियत के लिए दुआ मांगते हैं। ईद के चांद वाली रात को इसलाम मजहब को
मानने वाले खुदा से दुआ मांगते हैं। और अपने और सारी इंसानियत के लिए नमाज
पढ़ते हैं। सुबह होते ही सब तैय्यार होते हैं और अपने को पवित्र करके नए
कपड़े पहनते हैं। छोटे बड़ों के साथ ईदगह जाते हैं। रास्ते में हर आने
जाने वाले से दुआ सलाम करते हैं। ईदगाह में सब एक हो जाते हैं। न कोई छोटा
न बड़ा। अल्लाह के आगे सब बंदे हैं। नमाज के बाद तकरीर होती है। इसमें
बताया जाता है कि खुदा का बनाया हर इंसान एक जैसा है। उसमें ऊंच नीच नहीं
देखनी चाहिए। इसलिए भी ईद में कमजोर गरीब लोगों को मदद की जाती है। ईद का
दिन आपसी खुशी का दिन बनाने के लिए खुदा ने जो सबसे बड़ी चीज नियत की है,
वह फितर है। खुशहाल लोग, अपनी अपनी हैसियत से कुछ पैसा या जरूरत का सामान
गरीब लोगों को देते हैं। इस तरह उनको भी ईद की खुशी में शामिल किया जाता
है। एक तरह से यह इस त्यौहार का बड़ा संदेश है। खुदा की दुनिया में कोई
छोटा बड़ा नहीं, सबसे प्यार करो। हमेशा इंसानियत के लिए सोचो। इससे वो भी
अपने बच्चों के लिए नए कपड़े खरीद लेते हैं। इदुल फित्र जैसे त्यौहार इसी
लिए मनाए जाते हैं, ताकि लोगों में आपसी प्यार मोहब्बत बनी रहे। मोहब्बत
का ये संदेश दूर दूर तक जाए। यह त्यौहार इसलिए है कि इस दिन पूरे समाज के
लिए खुशी का दिन बन जाए और वो तमाम लोग को नई जिंदगी देने वाला साबित हो।
सच्ची ईद वही है, जिसमें सारी इंसानियत के लिए खुशी अमन की दुआ हो।

Bassar

bassar@aol.in
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रूप बड़ा या गुण ? Beauty or quality ?

सम्राट चंद्रगुप्त ने एक दिन अपने प्रतिभाशाली मंत्री चाणक्य से कहा-
"कितना अच्छा होता कि तुम अगर रूपवान भी होते।"
चाणक्य ने उत्तर दिया,
"महाराज रूप तो मृगतृष्णा है। आदमी की पहचान तो गुण और बुद्धि से ही होती
है, रूप से नहीं।"
"क्या कोई ऐसा उदाहरण है जहाँ गुण के सामने रूप फींका दिखे। चंद्रगुप्त ने
पूछा।
"ऐसे तो कई उदाहरण हैं महाराज, चाणक्य ने कहा, "पहले आप पानी पीकर मन को
हल्का करें बाद में बात करेंगे।"
फिर उन्होंने दो पानी के गिलास बारी बारी से राजा की ओर बढ़ा दिये।
"महाराज पहले गिलास का पानी इस सोने के घड़े का था और दूसरे गिलास का पानी
काली मिट्टी की उस
मटकी का था। अब आप बताएँ, किस गिलास का पानी आपको मीठा और स्वादिष्ट लगा।"
सम्राट ने जवाब दिया- "मटकी से भरे गिलास का पानी शीतल और स्वदिष्ट लगा
एवं उससे तृप्ति भी मिली।"
वहाँ उपस्थित महारानी ने मुस्कुराकर कहा, "महाराज हमारे प्रधानमंत्री ने
बुद्धिचातुर्य से प्रश्न का उत्तर दे
दिया। भला यह सोने का खूबसूरत घड़ा किस काम का जिसका पानी बेस्वाद लगता
है। दूसरी ओर
काली मिट्टी से बनी यह मटकी, जो कुरूप तो लगती है लेकिन उसमें गुण छिपे
हैं। उसका शीतल सुस्वादु पानी पीकर
मन तृप्त हो जाता है। आब आप ही बतला दें कि रूप बड़ा है अथवा गुण एवं
बुद्धि?"


Bassar

bassar@aol.in
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What is ramdan (ramzan) ?

I have so many non-muslim friends who are asking about ramdan.. Here i
tried to give so little information about holy month ramdan

Ramadan is a very special time
for Muslims, but the feelings and
lessons we experience should
stay with us throughout the year.
In the Qur'an, Muslims are
commanded to fast so that they
may "learn self-restraint" (Qur'an
2:183). This restraint and
devotion is especially felt during
Ramadan, but we all must strive
to make the feelings and attitudes
stay with us during our "normal"
lives. That is the true goal and test
of Ramadan.
Benefits of Ramadan:
• Through fasting, a Muslim
experiences hunger and thirst,
and sympathizes with those in
the world who have little to eat
every day.
• Through increased devotion,
Muslims feel closer to their
Creator, and recognize that
everything we have in this life is
a blessing from Him.
• Through increased charity,
Muslims develop feelings of
generosity and good-will toward
others. The Prophet Muhammad
(peace be upon him) once said, "A
man's wealth is never diminished
by charity."
• Through self-control, a Muslim
practices good manners, good
speech, and good habits.
• Through changing routines,
Muslims have a chance to
establish more healthy lifestyle
habits -- particularly with regards
to diet and smoking.
• Through family and community
gatherings, Muslims strengthen
the bonds of brotherhood and
sisterhood, in their own
communities and throughout the
world.

May Allah accept our fasting,
forgive our sins, and guide us all
to the Straight Path. May Allah
bless us all during Ramadan, and
throughout the year, with His
forgiveness, mercy, and peace,
and bring us all closer to Him and
to each other.
Bassar

bassar@aol.in
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मैं हूँ अपनी माँ दुलारा,मुझे लिखना नहीं आता मेरा जीवन उसको समर्पित जिसे पढना नहीं आता....

मैं हूँ अपनी माँ दुलारा,मुझे
लिखना नहीं आता
मेरा जीवन उसको समर्पित जिसे
पढना नहीं आता
जिसे क कबूतर नहीं आता प्रश्न उत्तर
नहीं आता
गिनतियाँ भी नहीं आती जोड़
बाकी कर न पाती
पर वो मेरी माँ प्यारी, अपमानित
उसको न करूँगा
आज मैं बिखरे शब्दों से,
भावों की माला पहनाकर
अपनी प्यारी भोली माँ के उस
नरमी आँचल का
अपनी इस छोटी कविता से,
मैंउसका श्रृंगार करूँगा
माँ का चेहरा नूर है, मेरे लिए सबके लिए
माँ खुशियों का पूर है, मेरे लिए सबके
लिए
माँ ने की खुशियाँ न्योछावर, अपने एक
बच्चे के लिए
माँ जली है चिराग बनकर, औलाद के
अच्छे के लिए
माँ खुदा की भेजी गयी, एक मनमोहक
मूरत है
उस मूरत की छाया की हर बच्चे को जरूरत
है
वो नहीं तो मैं न होता, माली बिन
उपवन न होता
वो खेत के बाड़ सी है ,
जिसकी सुरक्षा से मैं सोता
सर्दी गर्मी बारिशों से, उसने ही हर बार
बचाया
रातों जागकर पाखियों से हवा देकर उसने
सुलाया
गरीबी का दंश झेला, कमाकर कर
खाना खिलाया
फटी साड़ी में बिता दी ज़िन्दगी पर
मेले
खिलौना दिलाया।
जिसने करदी हर ख़ुशी कुर्बान बच्चे के
लिए
जिसने गले लगाया गम को उसके अच्छे
के लिए
रात दिन बस कुछ न जाना, कहाँ पहुँच
गया जमाना
उम्मीद के सपने ही संजोये बच्चे
को अपना माना
पर हाय रे ये स्वार्थ की मकड़ी ने जले इतने
बना लिए
उसके आँख के तारो ने माँ सेदूर घर
बना लिए
उसके बेटे शहरो के आकर्षण में झूल गए
वो इतने बड़े हो गए की माँ की ममता भूल
गए
ये वो ही बेटे हैं जो माँ की आँखों के तारे
थे
वो लगते थे माँ को पूरी दुनिया से प्यारे थे
क्या लाख दुआएं मांगी थी उसके रहमत
की
दिन रात फिकर करती थी उन बेटों के
सेहत की
वो बेटे उस बूढी माँ को रोटी देते कतराते
हैं
उसके बीमार हो जाने पर खर्चे से घबराते हैं
मैंने माँओं को सड़कों पर रोटी चुगते
देखा है
उनकी सपनों के क्षतिग्रस्त
जीवनचित्रों को देखा है
इन्ही दिनों की खातिर उसने इतने
दुखदर्द जिए
उसकी आवश्यकता हेतु जीवन भर संघर्ष
किये
फूट फूट कर रोई होगी उमीदों की आँखें
उसकी
जब टूटी उसकी ख्वाब
संजोती आसमा की राहे उसकी
हम सोचा करते थे पत्थर से कठोर
क्या होता है
जो पिघलता नही पर टूट जाता है
लेकिन जब ये बात सुनी तो सातों सागर
खोल गए
भूकंप सा झटका लगा की मन पर्वत डोल
गए
जब हैवानो ने धरती की छाती पर
बड़ा पाप कर डाला
कुछ बेटो मिलकर माँ को मौत की नींद
सुला डाला
उन लोगो ने क़त्ल किया एक बुढ़िया के
सपनो का
क़त्ल किया उन लोगो रिश्ते
नातों अपनों का
ये मान लिया मेरे दिल ने पत्थर से कठोर
कुछ तो है
सागर से खारा और काजल से काला कुछ
तो है
कैसे बेटों ने मार दिया जो जीवन देने
वाली थी
कैसे वो सब कुछ भूल गए जो उनके जीवन
की माली थी
मेरे समाज की ये देख के मेंभी रोता है
भारत के टूटते संस्कारों पर में
आपा खोता है
ये कलमकार विनती करता है
संस्कृति के रखवारो से
भारत के सजग सुपुत्रों से अपनी माओं के
राजदुलारों से
माँ दुर्गा माँ की मूरत है,माँ सीता माँ सूरत है
माँ की शक्ति है माँ हर बच्चे की जरूरत है
उसकी हीरे सी आंखों में आंसू न
कभी आने देना
उसकी उजियारी राहों में अधियारे न
कभी छाने देना
वो ही भगवान् तुम्हारी है, वजूद
की परिभाषा है
वो जीवन की सोची हर मंजिल
की आशा हैं
उससे कुछ नहीं चाहिए बस तुम जी भर
प्यार करो
पूरी करो हर उसकी ख्वाइश घर में तुम
त्यौहार करो
ये नहीं पर बात ये
पूरी दुनिया ही कहती है
उस बेटे से दुःख दूर ही रहता है
जिसकी माँ सुख से रहती है
माँ की हंसी की किलकारी से घर स्वर्ग
सा लगता है
उसके आँचल की हरियाली से आँगन
उपवन सा लगता है
इसलिए तुम अपनी प्यारी माँ से जी भर
के प्यारी करो
वो घर की लक्ष्मी है अपमान
नही सत्कार करो
वो हर बेटे धनवान हैं जिनकी माँ बाप
जीवित है
उनके पैरो को खोल
पियो वो ही कलियुग का अमृत ह

Bassar

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दुनिया का सबसे बड़ा रोग "क्या कहेंगे लोग"

दुनिया का सबसे बड़ा रोग "क्या कहेंगे
लोग"
ज़िंदगी में आप जो करना चाहते हैं
वो जरुर कीजिये,
ये मत सोचिये कि लोग क्या कहेंगे ।
क्योंकि लोग तो तब भी कुछ कहते हैं,
जब आप कुछ नहीं करते........!!

Bassar

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Beautiful Salam: Tajdar-e- Haram Ae Shahenshah-e- Dee(n) Tum Pe..........

Aa'oozobillahi Minash Shaitaanir Rajeem
Bismillahir Rehmanir Raheem
Sallallaho Ala Mohammadiyun Wa Aaalihi Wasallam
Tajdar-e-Haram Ae Shahenshah-e-Deen
Tumpe Har Dam Karoron Durood O Salam
Ho Nigah-e-Karam Humpe Sultan-e-Deen
Tumpe Har Dam Karoron Durood O Salam
-------
Koi Husn-e-Amal Paas Mere Nahi
Phas Na Jaaon Qayamat Main Mola Kahin
Ae Shafee Ae Umam La'aj Rakhna Tumhi
Tumpe Har Dam Karoron Durood O Salam
Ho Nigah-e-Karam Humpe Sultan-e-Deen
Tumpe Har Dam Karoron Durood O Salam
------
Door Reh Kar Na Dum Toot Jaaye Kaheen
Kash Taiba Main Ay Mere Mah-e-Mubeen
Dafan Honay Ko Mil Jaaye Do Gaz Zameen
Tumpay Har Dam Karoron Durood O Salam
Ho Nigah-e-Karam Humpe Sultan-e-Deen
Tumpe Har Dam Karoron Durood O Salam
------
Dono Alam Main Koi Bhi Tumsa Nahi
Sab Haseeno Se Bar Kar Tumhi Ho Haseen
Kasim-e-Rizq-e-Rabul Ula Ho Tumhi
Tumpe Har Dam Karoron Durood O Salam
Ho Nigah-e-Karam Humpe Sultan-e-Deen
Tumpe Har Dam Karoron Durood O Salam
-------
Teri Yaadon Se Maamur Seena rahe
Lab Pe Har Dam Madina-Madina Rahe
Bas Mai Deewana Ban Jaun Sultane Dee(n)
Tumpe Har Dam Karoron Durood O Salam
Ho Nigah-e-Karam Humpe Sultan-e-Deen
Tumpe Har Dam Karoron Durood O Salam
-----------
Phir Bulalo Madine Me Attar Ko
Ye Tarapta Hai Taiba Ke Deedar ko
Koi Iske Siwa Aarzu Hi Nahi
Tumpe Har Dam Karoron Durood O Salam
Ho Nigah-e-Karam Humpe Sultan-e-Deen
Tumpe Har Dam Karoron Durood O Salam


Bassar

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Beautiful student shaayri...physics shayari....

Jab usko phli bar 80 m lengh & 50 m height ki balkony se dkha
to average speed me mere dil ka momentum hone laga
Pyar current sa dil mein behne laga
Main uske magnetic field mein rehne laga.
Dua hai meri usse kabhi collision ho jaye.
Aisa torque lage usse ki woh
unstable equilibrium ho jaye.
Pyar ka shock usse bhi lag jaye..
High kinetic energy se woh mere galey lag jaye
Warna uranium nucleus sa toot jaunga.
Free falling body sa building se kud jaunga :D :P

Bassar

bassar@aol.in
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GHALIB vs IQBAL vs FARAZ vs WASI vs AYYAZ

Today is world poetry day....and every one knows i have deep interest
in poetry...just read the below combination.....best of urdu/hindi
poets....



Ghalib:

Ghalib Sharab Peene De Masjid Mein Beth Ker,

Ya Wo Jagah Bata Jahan Khuda Nahi.


Iqbal:

Masjid Khuda Ka Ghar Hai Peene Ki Jagah Nahi,

Kafir K Dil Mein Ja Wahan Khuda Nahi.


Faraz:

Kafir K Dil Se Ayah On Ye Dekh Ker Faraz,

Khuda Mojood Hai Wahan Per Usay Pata Nahi……


Wasi:

Khuda To Mojood Dunia Mein Her Jaga Hai,

Tu Jannat Mein Ja Wahan Peene Se Mana Nahi……


Ayyaz:

Peene K Liya Mukadas Jagay Na Duhand Ayyaz,

Ager Tujha Duniya Sa Hi Ba-Khaber Raha Na Hai.

Peene Ki Per Kia Zarorat Hai Khuda Ki Kasam,

Sajda Ma Juka Raha Din Raat Is K Nasha Zindagi Bhair Nahi Utra Ga…….


sunny

suna hai sajday to iblees nan bi kiay boht SUNNY

IS SA CHLA PTA SAJDA BI NAHIEN DAITA KUCH

Bassy
milta hai sab kuch sajde me 'bassy'
jo na mile to apne dil ko saaf kardena...


Just see the controversi..... <3


Bassar

bassar@aol.in
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