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अँधेरों पर भारी उजाले रहेंगे ...तो हाथों में सबके निवाले रहेंगे...

अँधेरों पर भारी उजाले रहेंगे
तो हाथों में सबके निवाले रहेंगे
न महफ़ूज़ रह पाएगी अपनी अस्मत
जुबाँ पर हमारी जो ताले रहेंगे
ग़मों से भरी ज़िन्दगी जी रहे हैं
मगर भ्रम ख़ुशी का ही पाले रहेंगे
यूँ आँसू बहाने से कुछ भी न होगा
अगर दिल हैं काले तो काले रहेंगे
बढ़ाते रहोगे अगर हौसला तुम
तो पतवार हम भी सँभाले रहेंगे

Bassar
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काश एक ऐसी भी फेसबुक होती, जिसमे सिर्फ मै होता, तुम होती,...a facebook shayari..

काश एक ऐसी भी फेसबुक होती,
जिसमे सिर्फ मै होता, तुम होती,
मै तुम्हे 'लाईक' करता रहता,
और तुम मुझे कमेन्ट करतीं रहतीं,
न कोई टैगिंग की ज़रुरत होती,
न कोई फ्रेंड रिक्वेस्ट हीहोती,
बस मै और तुम ही छाये रहते,
कोई फालतू फ्रेंड-लिस्ट न होती,
भावनाएं हमारी खूब व्यक्त होतीं,
न मै शरमाता न तुम शरमातीं,
कोई हमें ब्लोक नहीं कर पाता,
ना ही अन्फ्रेंड की नौबत होती,
लाईक कमेन्ट की आज़ादी होती,
एक दुजे पे न कोई पाबन्दी होती,
न मै झांकता तुम्हारी लिस्ट में,
ना ही तुम्हे कोई जलन होती.
तुम मुझे निर्भय हो लाईक करतीं,
मना करने से किसीके ना रुकतीं,
ना कोई ग्रुप होता न राजनीती,
मै मेम्बर होता तुम एडमिन होतीं.

Bassar

bassar@aol.in
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मैं हूँ अपनी माँ दुलारा,मुझे लिखना नहीं आता मेरा जीवन उसको समर्पित जिसे पढना नहीं आता....

मैं हूँ अपनी माँ दुलारा,मुझे
लिखना नहीं आता
मेरा जीवन उसको समर्पित जिसे
पढना नहीं आता
जिसे क कबूतर नहीं आता प्रश्न उत्तर
नहीं आता
गिनतियाँ भी नहीं आती जोड़
बाकी कर न पाती
पर वो मेरी माँ प्यारी, अपमानित
उसको न करूँगा
आज मैं बिखरे शब्दों से,
भावों की माला पहनाकर
अपनी प्यारी भोली माँ के उस
नरमी आँचल का
अपनी इस छोटी कविता से,
मैंउसका श्रृंगार करूँगा
माँ का चेहरा नूर है, मेरे लिए सबके लिए
माँ खुशियों का पूर है, मेरे लिए सबके
लिए
माँ ने की खुशियाँ न्योछावर, अपने एक
बच्चे के लिए
माँ जली है चिराग बनकर, औलाद के
अच्छे के लिए
माँ खुदा की भेजी गयी, एक मनमोहक
मूरत है
उस मूरत की छाया की हर बच्चे को जरूरत
है
वो नहीं तो मैं न होता, माली बिन
उपवन न होता
वो खेत के बाड़ सी है ,
जिसकी सुरक्षा से मैं सोता
सर्दी गर्मी बारिशों से, उसने ही हर बार
बचाया
रातों जागकर पाखियों से हवा देकर उसने
सुलाया
गरीबी का दंश झेला, कमाकर कर
खाना खिलाया
फटी साड़ी में बिता दी ज़िन्दगी पर
मेले
खिलौना दिलाया।
जिसने करदी हर ख़ुशी कुर्बान बच्चे के
लिए
जिसने गले लगाया गम को उसके अच्छे
के लिए
रात दिन बस कुछ न जाना, कहाँ पहुँच
गया जमाना
उम्मीद के सपने ही संजोये बच्चे
को अपना माना
पर हाय रे ये स्वार्थ की मकड़ी ने जले इतने
बना लिए
उसके आँख के तारो ने माँ सेदूर घर
बना लिए
उसके बेटे शहरो के आकर्षण में झूल गए
वो इतने बड़े हो गए की माँ की ममता भूल
गए
ये वो ही बेटे हैं जो माँ की आँखों के तारे
थे
वो लगते थे माँ को पूरी दुनिया से प्यारे थे
क्या लाख दुआएं मांगी थी उसके रहमत
की
दिन रात फिकर करती थी उन बेटों के
सेहत की
वो बेटे उस बूढी माँ को रोटी देते कतराते
हैं
उसके बीमार हो जाने पर खर्चे से घबराते हैं
मैंने माँओं को सड़कों पर रोटी चुगते
देखा है
उनकी सपनों के क्षतिग्रस्त
जीवनचित्रों को देखा है
इन्ही दिनों की खातिर उसने इतने
दुखदर्द जिए
उसकी आवश्यकता हेतु जीवन भर संघर्ष
किये
फूट फूट कर रोई होगी उमीदों की आँखें
उसकी
जब टूटी उसकी ख्वाब
संजोती आसमा की राहे उसकी
हम सोचा करते थे पत्थर से कठोर
क्या होता है
जो पिघलता नही पर टूट जाता है
लेकिन जब ये बात सुनी तो सातों सागर
खोल गए
भूकंप सा झटका लगा की मन पर्वत डोल
गए
जब हैवानो ने धरती की छाती पर
बड़ा पाप कर डाला
कुछ बेटो मिलकर माँ को मौत की नींद
सुला डाला
उन लोगो ने क़त्ल किया एक बुढ़िया के
सपनो का
क़त्ल किया उन लोगो रिश्ते
नातों अपनों का
ये मान लिया मेरे दिल ने पत्थर से कठोर
कुछ तो है
सागर से खारा और काजल से काला कुछ
तो है
कैसे बेटों ने मार दिया जो जीवन देने
वाली थी
कैसे वो सब कुछ भूल गए जो उनके जीवन
की माली थी
मेरे समाज की ये देख के मेंभी रोता है
भारत के टूटते संस्कारों पर में
आपा खोता है
ये कलमकार विनती करता है
संस्कृति के रखवारो से
भारत के सजग सुपुत्रों से अपनी माओं के
राजदुलारों से
माँ दुर्गा माँ की मूरत है,माँ सीता माँ सूरत है
माँ की शक्ति है माँ हर बच्चे की जरूरत है
उसकी हीरे सी आंखों में आंसू न
कभी आने देना
उसकी उजियारी राहों में अधियारे न
कभी छाने देना
वो ही भगवान् तुम्हारी है, वजूद
की परिभाषा है
वो जीवन की सोची हर मंजिल
की आशा हैं
उससे कुछ नहीं चाहिए बस तुम जी भर
प्यार करो
पूरी करो हर उसकी ख्वाइश घर में तुम
त्यौहार करो
ये नहीं पर बात ये
पूरी दुनिया ही कहती है
उस बेटे से दुःख दूर ही रहता है
जिसकी माँ सुख से रहती है
माँ की हंसी की किलकारी से घर स्वर्ग
सा लगता है
उसके आँचल की हरियाली से आँगन
उपवन सा लगता है
इसलिए तुम अपनी प्यारी माँ से जी भर
के प्यारी करो
वो घर की लक्ष्मी है अपमान
नही सत्कार करो
वो हर बेटे धनवान हैं जिनकी माँ बाप
जीवित है
उनके पैरो को खोल
पियो वो ही कलियुग का अमृत ह

Bassar

bassar@aol.in
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दुनिया का सबसे बड़ा रोग "क्या कहेंगे लोग"

दुनिया का सबसे बड़ा रोग "क्या कहेंगे
लोग"
ज़िंदगी में आप जो करना चाहते हैं
वो जरुर कीजिये,
ये मत सोचिये कि लोग क्या कहेंगे ।
क्योंकि लोग तो तब भी कुछ कहते हैं,
जब आप कुछ नहीं करते........!!

Bassar

bassar@aol.in
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